
गंगा सा पवित्र ❤️


वो कहते थे मुझसे
वो बदनाम होते हैं मेरी वजह से
अब चाँद पर दाग अच्छे नही लगते
बस मैं दूर रहने लगा उनसे इसी वजह से
– Alok kathait
नज़रों की , नजरों पर , नज़रों से नज़र है
ज़माने को , ज़माने की , ज़माने से खबर है
जलन की , जलन से , जलता ये शहर है
इंसान ही , इंसान में भरता ये जहर है
सच को , सच बोलने से , सच सुनने का डर है
समय का , समय पर , इस समय ये असर है
- Alok kathait