नज़रों की , नजरों पर , नज़रों से नज़र है
ज़माने को , ज़माने की , ज़माने से खबर है
जलन की , जलन से , जलता ये शहर है
इंसान ही , इंसान में भरता ये जहर है
सच को , सच बोलने से , सच सुनने का डर है
समय का , समय पर , इस समय ये असर है
- Alok kathait
नज़रों की , नजरों पर , नज़रों से नज़र है
ज़माने को , ज़माने की , ज़माने से खबर है
जलन की , जलन से , जलता ये शहर है
इंसान ही , इंसान में भरता ये जहर है
सच को , सच बोलने से , सच सुनने का डर है
समय का , समय पर , इस समय ये असर है
- Alok kathait
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